प्रश्न 1.
'बादल की मृत्यु' नाटक किसका है ?
(A) जयशंकर प्रसाद
(B) प्रेमचंद
(C) उपेन्द्रनाथ 'अश्क'
(D) रामकुमार वर्मा
उत्तर:
सही विकल्प: (D) रामकुमार वर्मा
('बादल की मृत्यु' सन् 1930 ई० में डॉ० रामकुमार वर्मा द्वारा रचित एकांकी/नाटक है।)
UP Board Class 10th Board Paper 2026 801(FD)
कक्षा 10वीं · हिंदी · 2026 · बोर्ड परीक्षा
'बादल की मृत्यु' नाटक किसका है ?
(A) जयशंकर प्रसाद
(B) प्रेमचंद
(C) उपेन्द्रनाथ 'अश्क'
(D) रामकुमार वर्मा
उत्तर:
सही विकल्प: (D) रामकुमार वर्मा
('बादल की मृत्यु' सन् 1930 ई० में डॉ० रामकुमार वर्मा द्वारा रचित एकांकी/नाटक है।)
जयशंकर प्रसाद के नाटक हैं
(i) चन्द्रगुप्त
(ii) स्कन्दगुप्त
(iii) सिंदूर की होली
(iv) अजातशत्रु
(A) (i), (ii) एवं (iii)
(B) (i), (ii) एवं (iv)
(C) (ii), (iii) एवं (iv)
(D) (i), (iii) एवं (iv)
उत्तर:
सही विकल्प: (B) (i), (ii) एवं (iv)
(चन्द्रगुप्त, स्कन्दगुप्त तथा अजातशत्रु जयशंकर प्रसाद के नाटक हैं, जबकि 'सिंदूर की होली' लक्ष्मीनारायण मिश्र की रचना है।)
'तंत्रालोक से यंत्रालोक तक' कृति की विधा है
(A) यात्रा-साहित्य
(B) नाटक
(C) उपन्यास
(D) कहानी
उत्तर:
सही विकल्प: (A) यात्रा-साहित्य
('तंत्रालोक से यंत्रालोक तक' डॉ० नगेंद्र द्वारा लिखित यात्रा-वृत्त/यात्रा-साहित्य विधा की रचना है।)
'अतीत के चलचित्र' किसकी रचना है ?
(A) जयशंकर प्रसाद
(B) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'
(C) महादेवी वर्मा
(D) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर:
सही विकल्प: (C) महादेवी वर्मा
('अतीत के चलचित्र' महादेवी वर्मा जी का प्रसिद्ध रेखाचित्र/संस्मरण है।)
'मेरी आत्मकहानी' किसकी आत्मकथा है ?
(A) पाण्डेय बेचन शर्मा 'उग्र'
(B) डॉ० श्यामसुन्दर दास
(C) देवराज उपाध्याय
(D) हरिवंश राय 'बच्चन'
उत्तर:
सही विकल्प: (B) डॉ० श्यामसुन्दर दास
('मेरी आत्मकहानी' (1941 ई०) डॉ० श्यामसुन्दर दास की प्रसिद्ध आत्मकथा है।)
कवि एवं उनकी रचनाओं के पूर्णतः सही मिलान वाले विकल्प का चयन कीजिए :
(i) केशव - 3. रामचंद्रिका
(ii) देव - 2. भाव विलास
(iii) भूषण - 1. शिवा बावनी
(iv) मतिराम - 4. रसराज
(A) (i)-3, (ii)-2, (iii)-4, (iv)-1
(B) (i)-1, (ii)-2, (iii)-3, (iv)-4
(C) (i)-3, (ii)-4, (iii)-2, (iv)-1
(D) (i)-3, (ii)-2, (iii)-1, (iv)-4
उत्तर:
सही विकल्प: (D) (i)-3, (ii)-2, (iii)-1, (iv)-4
- केशवदास → रामचंद्रिका
- देव → भाव विलास
- भूषण → शिवा बावनी
- मतिराम → रसराज
निम्नलिखित में से कौन-सा कवि रीतिकाल के अंतर्गत 'वीर रस' का कवि नहीं है ?
(A) बिहारीलाल
(B) भूषण
(C) लाल कवि
(D) सूदन
उत्तर:
सही विकल्प: (A) बिहारीलाल
(भूषण, लाल कवि तथा सूदन रीतिकाल के वीर रस के कवि हैं, जबकि बिहारीलाल मुख्य रूप से श्रृंगार एवं भक्ति रस के कवि हैं।)
'राम की शक्तिपूजा' किसकी रचना है ?
(A) जयशंकर प्रसाद
(B) सुमित्रानंदन पंत
(C) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
(D) महादेवी वर्मा
उत्तर:
सही विकल्प: (C) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
('राम की शक्तिपूजा' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की प्रसिद्ध महाकाव्यात्मक कविता है।)
'गीत फरोश' काव्य-संग्रह किसका है ?
(A) गिरिजाकुमार माथुर
(B) रामधारी सिंह 'दिनकर'
(C) भवानीप्रसाद मिश्र
(D) रामविलास शर्मा
उत्तर:
सही विकल्प: (C) भवानीप्रसाद मिश्र
('गीत फरोश' भवानीप्रसाद मिश्र का प्रसिद्ध काव्य-संग्रह है।)
'दूसरा सप्तक' का प्रकाशन वर्ष है
(A) 1943 ई०
(B) 1951 ई०
(C) 1959 ई०
(D) 1979 ई०
उत्तर:
सही विकल्प: (B) 1951 ई०
(प्रथम तार सप्तक: 1943 ई०, दूसरा सप्तक: 1951 ई०, तीसरा सप्तक: 1959 ई०, चौथा सप्तक: 1979 ई०।)
'हास' किस रस का स्थायी भाव है ?
(A) हास्य
(B) करुण
(C) शांत
(D) शृंगार
उत्तर:
सही विकल्प: (A) हास्य
('हास' हास्य रस का स्थायी भाव है।)
मुख चपला-सा दुख-घन में ।
उलझा है चंचल मन-कुरंग ।
उपर्युक्त पंक्तियों के रेखांकित अंश में कौन-सा अलंकार है ?
(A) उपमा
(B) उत्प्रेक्षा
(C) यमक
(D) रूपक
उत्तर:
सही विकल्प: (D) रूपक
(रेखांकित अंश "मन-कुरंग" में मन (उपमेय) पर कुरंग/हिरण (उपमान) का अभेद आरोप होने के कारण रूपक अलंकार है।)
'दोहा' किस प्रकार का मात्रिक छंद है ?
(A) सम
(B) अर्धसम
(C) विषम
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
सही विकल्प: (B) अर्धसम
(दोहा एक अर्धसम मात्रिक छंद है, जिसके प्रथम और तृतीय चरण में 13-13 तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं।)
'अभ्यागत' में प्रयुक्त उपसर्ग है
(A) अभ्य
(B) अभ्
(C) अभ्या
(D) अभि
उत्तर:
सही विकल्प: (D) अभि
(अभ्यागत = अभि + आगत। इसमें 'अभि' उपसर्ग है।)
'कृष्णसर्प' में कौन-सा समास है ?
(A) कर्मधारय समास
(B) द्वन्द्व समास
(C) द्विगु समास
(D) तत्पुरुष समास
उत्तर:
सही विकल्प: (A) कर्मधारय समास
(कृष्णसर्प = काला सर्प। यहाँ विशेषण-विशेष्य सम्बन्ध होने से कर्मधारय समास है।)
'समुद्र' का पर्यायवाची शब्द नहीं है
(A) जलधि
(B) पारावार
(C) जलद
(D) नीरनिधि
उत्तर:
सही विकल्प: (C) जलद
('जलद' बादल का पर्यायवाची है, जबकि जलधि, पारावार और नीरनिधि समुद्र के पर्यायवाची शब्द हैं।)
'तद्' (स्त्रीलिंग) सर्वनाम शब्द का तृतीया विभक्ति, बहुवचन में रूप होगा
(A) तया
(B) ताभिः
(C) तस्यै
(D) तयोः
उत्तर:
सही विकल्प: (B) ताभिः
('तद्' स्त्रीलिंग तृतीया विभक्ति: एकवचन - तया, द्विवचन - ताभ्याम्, बहुवचन - ताभिः।)
"आपकी यात्रा मंगलमय हो।" अर्थ के आधार पर किस प्रकार का वाक्य है ?
(A) संकेतार्थक वाक्य
(B) विस्मयादिबोधक वाक्य
(C) आज्ञाार्थक वाक्य
(D) इच्छार्थक वाक्य
उत्तर:
सही विकल्प: (D) इच्छार्थक वाक्य
(जिस वाक्य में शुभकामना या इच्छा व्यक्त की गई हो, वह इच्छार्थक वाक्य कहलाता है।)
"वह शांत नहीं रहता है।" इसका भाव वाच्य में परिवर्तन होगा
(A) वह शांत रह लेगा।
(B) उनसे/उससे शांत नहीं रहा जाता है।
(C) उसके द्वारा शांत रह लिया जाएगा।
(D) वह शांत रह सकता है।
उत्तर:
सही विकल्प: (B) उनसे/उससे शांत नहीं रहा जाता है।
"हम अपने देश पर मर मिटेंगे।"
वाक्य में रेखांकित पद का परिचय है
(A) संज्ञा
(B) क्रिया
(C) सर्वनाम
(D) क्रिया-विशेषण
उत्तर:
सही विकल्प: (C) सर्वनाम
('हम' पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष, बहुवचन) है।)
खण्ड – 'ब' (वर्णनात्मक प्रश्न)
निम्नलिखित में से किसी एक गद्यांश पर आधारित सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
[प्रथम गद्यांश]
"हमारी सारी संस्कृति का मूलाधार इसी अहिंसा-तत्त्व पर स्थापित रहा है। जहाँ-जहाँ हमारे नैतिक सिद्धान्तों का वर्णन आया है, अहिंसा को ही उसमें मुख्य स्थान दिया गया है। अहिंसा का दूसरा नाम या दूसरा रूप त्याग है और हिंसा का दूसरा रूप या नाम स्वार्थ, जो बहुत करके भोग के रूप में हमारे सामने आता है। पर हमारी सभ्यता ने तो भोग भी त्याग से ही निकाला है और भोग भी त्याग में ही पाया है। श्रुति कहती है–'तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा'। इसी के द्वारा हम व्यक्ति-व्यक्ति के बीच का विरोध, व्यक्ति और समाज के बीच का विरोध, समाज और समाज के बीच का विरोध देश और देश के बीच के विरोध को मिटाना चाहते हैं। हमारी सारी नैतिक चेतना इसी तत्त्व से ओत-प्रोत है।"
(i) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
उत्तर:
सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिंदी' के गद्य-खण्ड में संकलित 'भारतीय संस्कृति' नामक अध्याय से उद्धृत है। इसके लेखक भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ० राजेन्द्र प्रसाद हैं।
(ii) हमारी संस्कृति का मूलाधार किसे बताया गया है ?
हल:
हमारी संस्कृति का मूलाधार अहिंसा-तत्त्व को बताया गया है।
(iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
हल:
रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक कहते हैं कि भारतीय चिंतनधारा में अहिंसा का व्यावहारिक रूप 'त्याग' है। जहाँ त्याग है, वहीं अहिंसा है। इसके विपरीत, हिंसा का मूल कारण मनुष्य का 'स्वार्थ' होता है, जो भौतिक भोग-विलास की लालसा के रूप में प्रकट होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति की यह अनूठी विशेषता रही है कि यहाँ भोग की अनुमति भी त्याग के उपरांत ही दी गई है। हमारी संस्कृति का मूल मंत्र ही 'तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा' (त्यागपूर्वक उपभोग करो) रहा है।
अथवा
[द्वितीय गद्यांश]
"मानव-मन सदा से ही अज्ञात के रहस्यों को खोलने और जानने-समझने को उत्सुक रहा है। जहाँ तक वह नहीं पहुँच सकता था, वहाँ वह कल्पना के पंखों पर उड़कर पहुँचा। उसकी अनगढ़ और अविश्वसनीय कथाएँ उसे सत्य के निकट पहुँचाने में प्रेरणा-शक्ति का काम करती रहीं।"
(i) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
हल:
सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिंदी' के गद्य-खण्ड में संकलित निबंध से लिया गया है।
(ii) मानव-मन सदैव किसके लिए उत्सुक रहा है ?
हल:
मानव-मन सदा से ही अज्ञात संसार और प्रकृति के रहस्यों को खोलने, जानने तथा समझने के लिए उत्सुक रहा है।
(iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
हल:
रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक का कथन है कि मनुष्य का मन जिज्ञासु प्रवृत्ति का है। भौतिक रूप से मनुष्य जहाँ तक प्रत्यक्ष रूप से पहुँच पाने में असमर्थ था, वहाँ उसने अपनी असीम कल्पना शक्ति का सहारा लिया। कल्पना के बल पर उसने दूर-दराज की दुनिया और अज्ञात रहस्यों की सैर की और धीरे-धीरे सत्य की खोज की ओर अग्रसर हुआ।
निम्नलिखित में से किसी एक पद्यांश पर आधारित सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
[प्रथम पद्यांश]
"अिबगत-गति कछु कहत न आवै।
ज्यों गँगे मीठे फल को रस, अंतरगत ही भावै।
परम स्वाद सबही सु निरंतर, अमित तोष उपजावै।
मन-बानी कौ अगम-अगोचर, सो जाने जो पावै।
रूप-रेख-गुन-जाति-जुगति-बिनु, निरालंब कित धावै।
सब विधि अगम विचारहि तातें, सूर सगुन-पद गावै।"
(i) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
उत्तर:
सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश महाकवि सूरदास द्वारा रचित 'सूरसागर' महाकाव्य से हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिंदी' के काव्य-खण्ड में संकलित 'पद' शीर्षक से उद्धृत है।
(ii) 'अगम-अगोचर' से क्या तात्पर्य है ? स्पष्ट कीजिए।
हल:
'अगम' का अर्थ है जहाँ तक पहुँचा न जा सके और 'अगोचर' का अर्थ है जिसे इन्द्रियों से न जाना जा सके। निराकार ईश्वर मन और वाणी से परे है तथा उसे आँखों एवं इन्द्रियों द्वारा प्रत्यक्ष नहीं देखा जा सकता, इसीलिए उसे 'अगम-अगोचर' कहा गया है।
(iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
हल:
रेखांकित अंश की व्याख्या: भक्तिकवि सूरदास जी कहते हैं कि निर्गुण तथा निराकार ब्रह्म की भक्ति के आनंद का वर्णन वाणी द्वारा नहीं किया जा सकता। ठीक उसी प्रकार, जैसे कोई गूँगा व्यक्ति मीठा फल खाने पर उसके आनंद और रस का अनुभव अपने मन ही मन (अंतःकरण) में करता है, किन्तु वाणी के अभाव में उसे बोलकर व्यक्त नहीं कर सकता।
अथवा
[द्वितीय पद्यांश]
"चढ़ चेतक पर तलवार उठा,
रखता था भूतल पानी को।
राणा प्रताप सिर काट-काट,
करता था सफल जवानी को ॥
सेना-नायक राणा के भी,
रण देख देखकर चाह भरे।
मेवाड़ सिपाही लड़ते थे,
दूने तिगुने उत्साह भरे ॥"
(i) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
हल:
सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश कवि श्यामनारायण पाण्डेय द्वारा रचित महाकाव्य 'हल्दीघाटी' से हमारी पाठ्यपुस्तक के काव्य-खण्ड में संकलित 'हल्दीघाटी' शीर्षक से उद्धृत है।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
हल:
रेखांकित अंश की व्याख्या: कवि कहते हैं कि हल्दीघाटी के भीषण युद्ध में महाराणा प्रताप अपने स्वामीभक्त घोड़े चेतक पर सवार होकर शत्रु सेना के वीरों का शीश काट-काटकर अपने युवा जीवन एवं पराक्रम को सार्थक कर रहे थे। उनका शौर्य देखकर शत्रु सेना भी भयभीत हो उठती थी।
(iii) उपर्युक्त पद्यांश में कौन-सा रस है ?
हल:
उपर्युक्त पद्यांश में वीर रस है।
नीचे दिये गये संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
[प्रथम गद्यांश]
'विश्वस्य स्रष्टा ईश्वरः एक एव' इति भारतीय-संस्कृतेः मूलम्। विविधमतावलम्बिनः विविधैः नामभिः एकम् एव ईश्वरं भजन्ते। अग्निः, इन्द्रः, कृष्णः, करीमः, रामः, रहीमः, जिनः, बुद्धः, ख्रिस्तः, अल्लाहः इत्यादीनि नामानि एकस्य एव परमात्माः सन्ति। तम् एव ईश्वरं जनाः गुरुः इत्यपि मन्यन्ते। अतः सर्वेषां मतानां समभावः सम्मानश्च अस्माकं संस्कृतेः सन्देशः।
उत्तर:
सन्दर्भ: प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड के 'भारतीय संस्कृतिः' पाठ से उद्धृत है।
हिन्दी अनुवाद:
"विश्व का रचयिता ईश्वर एक ही है" - यह भारतीय संस्कृति का मूल आधार है। विभिन्न मतों को मानने वाले लोग अनेक नामों से एक ही ईश्वर का भजन/आराधन करते हैं। अग्नि, इन्द्र, कृष्ण, करीम, राम, रहीम, जिन, बुद्ध, ईसा मसीह (ख्रिस्त), अल्लाह इत्यादि नाम एक ही परमात्मा के हैं। उसी ईश्वर को लोग 'गुरु' रूप में भी मानते हैं। अतः सभी मतों के प्रति समान भाव और आदर रखना ही हमारी संस्कृति का सन्देश है।
अथवा
[द्वितीय गद्यांश]
आम् राष्ट्रद्रोहः यवनराज ! एकम् इदं भारतं राष्ट्रम्, बहूनि चात्र राज्यानि, बहवश्च शासकाः। त्वं मैत्रीसन्धिना तान् विभज्य भारतं जेतुम् इच्छसि। आम्भीकः चास्य प्रत्यक्षं प्रमाणम्।
हल:
सन्दर्भ: प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड के 'वीरः वीरेण पूज्यते' पाठ से उद्धृत है।
हिन्दी अनुवाद:
(पुरुराज कहते हैं–) "हाँ, यह राष्ट्रद्रोह है यवनराज! यह भारत देश एक राष्ट्र है, और यहाँ बहुत से राज्य तथा कई शासक हैं। तुम मित्रता की सन्धि द्वारा उन्हें विभाजित करके भारत को जीतने की इच्छा रखते हो। आम्भीक इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।"
निम्नलिखित संस्कृत पद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
[प्रथम पद्यांश]
क्षीर-नीर-विवेक हंसालस्यं त्वमेव तनुषे चेत्।
विश्वस्मिन्नधुनान्यः कुलव्रतं पालयिष्यति कः ॥
उत्तर:
सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड के 'अन्योक्तिविलासः' पाठ से उद्धृत है।
हिन्दी अनुवाद:
हे हंस! यदि तुम ही दूध और पानी का विवेक (अलग-अलग) करने में आलस्य करोगे, तो इस संसार में अब दूसरा कौन ऐसा है जो अपने कुल के व्रत का पालन करेगा? (अर्थात् गुणी व्यक्ति ही यदि अपने कर्तव्य से विमुख हो जाएँगे, तो समाज में न्याय और सत्य की रक्षा कौन करेगा?)
अथवा
[द्वितीय पद्यांश]
बन्धनं मरणं वापि जयो वापि पराजयः।
उभयत्र समो वीरः वीरभावो ही वीरता ॥
हल:
सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड के 'वीरः वीरेण पूज्यते' पाठ से उद्धृत है।
हिन्दी अनुवाद:
चाहे बन्धन हो या मरण हो, जय हो या पराजय हो; वीर पुरुष दोनों ही स्थितियों में समान रहता है। वीर भाव (समानता एवं निर्भीकता) का होना ही वास्तव में वीरता है।
अपने पठित खण्डकाव्य के आधार पर दिए गए प्रश्नों में से किसी एक खण्ड के किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए :
(नोट: विद्यार्थी अपने जिले के निर्धारित खण्डकाव्य के अनुसार एक प्रश्न हल करें। यहाँ परीक्षा की दृष्टि से प्रमुख खण्डकाव्यों के उत्तर दिए गए हैं।)
(क) 'मुक्तिदूत' (डॉ० राजेन्द्र मिश्र)
(i) 'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के चतुर्थ सर्ग की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य का चतुर्थ सर्ग 'भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम' एवं 'भारत छोड़ो आन्दोलन' से सम्बन्धित है। इसमें सन् 1942 ई० के 'भारत छोड़ो' आन्दोलन तथा गांधी जी के नेतृत्व में चले देशव्यापी जन-जागरण का वर्णन है। गांधी जी ने 'करो या मरो' का नारा दिया। अंग्रेजों के अत्याचार बढ़े किन्तु देशवासियों का उत्साह नहीं दबा। अन्ततः अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर विवश होना पड़ा और देश स्वतन्त्रता की दिशा में आगे बढ़ा।
(ii) 'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के नायक महात्मा गांधी की चारित्रिक विशेषताएं लिखिए।
हल:
गांधी जी 'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के नायक हैं। उनकी मुख्य चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. सत्य और अहिंसा के पुजारी: गांधी जी ने असत्य और हिंसा का विरोध सत्य और अहिंसा रूपी अस्त्रों से किया।
2. हरिजन उद्धारक: उन्होंने समाज से छुआछूत और अस्पृश्यता को मिटाने के लिए अथक प्रयास किया।
3. महान देशभक्त एवं निर्भीक नेता: उन्होंने अंग्रेजों के दमनचक्र की परवाह किए बिना देश को आजाद कराने का दृढ़ संकल्प लिया।
(ख) 'ज्योति जवाहर' (देवीप्रसाद शुक्ल 'राही')
(i) 'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य के नायक पंडित जवाहरलाल नेहरू का चरित्र-चित्रण कीजिए।
हल:
पंडित जवाहरलाल नेहरू 'ज्योति जवाहर' के नायक हैं। उनकी विशेषताएँ:
1. अलौकिक एवं युगान्कारी व्यक्तित्व: नेहरू जी में भारत के समस्त महापुरुषों (राम, कृष्ण, बुद्ध, अशोक आदि) के दिव्य गुणों का समावेश है।
2. राष्ट्रप्रेमी एवं जननायक: वे भारत की विशालता और सांस्कृतिक विविधता के प्रतीक हैं।
3. शान्ति और प्रगति के दूत: वे विश्व में पञ्चशील सिद्धांतों द्वारा शान्ति स्थापित करने वाले दूरदर्शी नेता हैं।
(च) 'मातृभूमि के लिए' (डॉ० जयशंकर त्रिपाठी)
(ii) 'मातृभूमि के लिए' खण्डकाव्य के नायक चन्द्रशेखर 'आजाद' का चरित्र-चित्रण कीजिए।
हल:
चन्द्रशेखर 'आजाद' इस खण्डकाव्य के नायक हैं। उनकी प्रमुख विशेषताएँ:
1. महान देशभक्त एवं क्रान्तिकारी: आजाद का सर्वस्व मातृभूमि की रक्षा और स्वतन्त्रता के लिए समर्पित था।
2. वीर एवं निर्भीक योद्धा: अल्फ्रेड पार्क में अकेला होते हुए भी उन्होंने अंग्रेजों की विशाल पुलिस टुकड़ी का वीरतापूर्वक सामना किया।
3. अमर बलिदानी: उन्होंने जीते-जी अंग्रेजों के हाथ न आने की प्रतिज्ञा पूरी की और अंतिम गोली स्वयं को मारकर मातृभूमि पर न्योछावर हो गए।
निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए :
(i) जयशंकर प्रसाद
उत्तर:
जीवन-परिचय:
छायावाद के प्रवर्तक तथा महान साहित्यकार जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 ई० में काशी के प्रसिद्ध 'सुँघनी साहू' वैश्य परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम देवीप्रसाद था। बचपन में ही माता-पिता का देहावसान हो जाने के कारण इनकी प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई, जहाँ इन्होंने हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, पाली और प्राकृत भाषाओं का गहन अध्ययन किया। जीवन में अनेक पारिवारिक आपदाओं और आर्थिक संकटों का सामना करते हुए भी इन्होंने महान साहित्य की रचना की। क्षयरोग (टी.बी.) से पीड़ित होने के कारण सन् 1937 ई० में मात्र 48 वर्ष की अल्पायु में इनका निधन हो गया।
प्रमुख रचना:
- कामायनी (प्रसिद्ध महाकाव्य)
(अन्य रचनाएँ: चन्द्रगुप्त, स्कन्दगुप्त, कंकाल, तितली, आँसू)
निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए :
(i) गोस्वामी तुलसीदास
उत्तर:
जीवन-परिचय:
भक्तिकाल की रामभक्ति शाखा के शिरोमणि कवि गोस्वामी तुलसीदास का जन्म सन् 1532 ई० (संवत् 1589) में बाँदा जिले के 'राजापुर' गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था। अभुक्त मूल नक्षत्र में जन्म लेने के कारण माता-पिता ने इन्हें त्याग दिया था। इनका बचपन अनेक कष्टों में बीता। इनके गुरु नरहरिदास थे, जिन्होंने इन्हें रामकथा की दीक्षा दी। इनका विवाह रत्नावली से हुआ। पत्नी के उपदेश से विरक्त होकर ये श्री राम की भक्ति में लीन हो गए। इन्होंने अपना अधिकांश जीवन काशी, अयोध्या और चित्रकूट में बिताया। सन् 1623 ई० (संवत् 1680) में काशी के असि घाट पर इनका निधन हुआ।
प्रमुख रचना:
- श्रीरामचरितमानस (सुप्रसिद्ध महाकाव्य)
(अन्य रचनाएँ: विनयपत्रिका, कवितावली, दोहावली, गीतावली)
अपनी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खण्ड की पाठ्यवस्तु से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए, जो इस प्रश्नपत्र में न आया हो।
उत्तर:
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
(अर्थ: सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त/निरोगी हों, सभी कल्याणकारी दृश्य देखें और कोई भी दुःख का भागी न बने।)
नगर में बढ़ती भीड़-भाड़ के कारण परिवहन की जटिल समस्या को हल करने के लिए सड़कों को और अधिक चौड़ा किये जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए अपने जिले के जिलाध्यक्ष / जिलाधिकारी महोदय को पत्र लिखिए।
उत्तर:
सेवा में,
जिलाधिकारी महोदय,
जिला कार्यालय, प्रयागराज (उ०प्र०)।
विषय: नगर में बढ़ती भीड़-भाड़ एवं परिवहन समस्या के समाधान हेतु सड़कों के चौड़ीकरण के सम्बन्ध में।
महोदय,
मैं इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान हमारे नगर में दिनों-दिन बढ़ रही विकट परिवहन समस्या तथा यातायात के दबाव की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
विगत कुछ वर्षों में नगर की जनसंख्या और वाहनों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हुई है, किन्तु मुख्य मार्ग और सड़कें अभी भी पुरानी एवं संकीर्ण हैं। इसके कारण मुख्य बाज़ारों, चौराहों तथा विद्यालय/अस्पताल जाने वाले मार्गों पर प्रतिदिन घंटों भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। संकरी सड़कों के कारण दुर्घटनाओं की सम्भावना बनी रहती है तथा आम जनता व एम्बुलेंस आदि आपातकालीन वाहनों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
अतः आपसे नम्र निवेदन है कि नगर की मुख्य सड़कों को चौड़ा करने, अवैध अतिक्रमण हटाने तथा सुचारु यातायात हेतु ठोस कदम उठाने की कृपा करें।
धन्यवाद।
भवदीय,
क० ख० ग०
नागरिक, मुख्य नगर, प्रयागराज।
दिनांक: 15 मार्च 2026
अथवा
अपने विद्यालय में खेल का सामान मँगवाने के लिए प्रधानाचार्य को पत्र लिखिए।
हल:
सेवा में,
श्रीमान प्रधानाचार्य महोदय,
राजकीय इंटर कॉलेज, मेरठ।
विषय: खेलकूद सामग्री मँगवाने हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 10 का छात्र एवं खेलकूद परिषद का प्रतिनिधि हूँ। आगामी माह में मण्डलीय क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें हमारे विद्यालय की टीम भाग लेगी।
अत्यंत खेद के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि विद्यालय के खेल कक्ष में फुटबॉल, क्रिकेट बैट, बॉल, बैडमिंटन रैकेट तथा नेट आदि खेल सामग्रियाँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं और जो उपलब्ध हैं वे जर्जर स्थिति में हैं। उचित सामग्री के अभाव में छात्र नियमित अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं।
अतः आपसे नम्र निवेदन है कि खेलकूद की नई सामग्री शीघ्र मँगवाने की कृपा करें ताकि सभी खिलाड़ी प्रतियोगिता हेतु उत्तम अभ्यास कर सकें।
धन्यवाद।
आपके आज्ञाकारी शिष्य,
अ० ब० स०
कक्षा – 10 'अ'
दिनांक: 15 मार्च 2026
निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए :
(i) श्वेतकेतुः कस्य पुत्रः आसीत् ?
उत्तर:
श्वेतकेतुः आरुणेः (उद्दालकस्य) पुत्रः आसीत्।
(ii) चन्द्रशेखरः स्वपितुः नाम किम् अकथयत् ?
हल:
चन्द्रशेखरः स्वपितुः नाम 'स्वतन्त्रः' इति अकथयत्।
(iii) ग्रामीणस्य प्रहेलिकायाः किम् उत्तरम् आसीत् ?
हल:
ग्रामीणस्य प्रहेलिकायाः उत्तरम् 'पत्रम्' (पत्र/चिट्ठी) आसीत्।
(iv) विद्या केन वर्धते ?
हल:
विद्या अभ्यासेन वर्धते।
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए : (अधिकतम शब्द सीमा 200)
(i) सड़क सुरक्षा : जीवन रक्षा
उत्तर:
रूपरेखा:
1. प्रस्तावना
2. सड़क दुर्घटनाओं के मुख्य कारण
3. सड़क सुरक्षा के प्रमुख नियम
4. उपाय एवं जागरूकता
5. उपसंहार
1. प्रस्तावना:
आज के आधुनिक युग में यातायात के साधनों की तीव्र वृद्धि ने जहाँ हमारे आवागमन को सुगम बनाया है, वहीं सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम भी अत्यधिक बढ़ा दिया है। 'सड़क सुरक्षा' केवल एक नियम नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का मूल मंत्र है।
2. सड़क दुर्घटनाओं के मुख्य कारण:
सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण चालकों की लापरवाही, यातायात नियमों की अनदेखी, अत्यधिक गति से वाहन चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, वाहन चलाते समय मोबाइल फ़ोन का प्रयोग करना तथा बिना हेलमेट/सीटबेल्ट के यात्रा करना है।
3. सड़क सुरक्षा के प्रमुख नियम:
- दोपहिया वाहन चालकों को सदैव उच्च गुणवत्ता वाला हेलमेट पहनना चाहिए।
- चारपहिया वाहन में सीटबेल्ट अनिवार्य रूप से लगानी चाहिए।
- ओवरस्पीडिंग (अत्यधिक गति) से बचना चाहिए तथा रेड लाइट/संकेतों का पालन करना चाहिए।
- पैदल यात्रियों को सदैव फुटपाथ तथा ज़ेबरा क्रॉसिंग का प्रयोग करना चाहिए।
4. उपाय एवं जागरूकता:
सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विद्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर नियमित जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। यातायात पुलिस द्वारा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर दण्ड एवं जुर्माना लगाना आवश्यक है।
5. उपसंहार:
"दुर्घटना से देर भली" और "सुरक्षा हटी, दुर्घटना घटी" जैसी सूक्तियों को हमें अपने आचरण में ढालना होगा। यदि प्रत्येक नागरिक यातायात नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करे, तो अमूल्य मानव जीवन की रक्षा की जा सकती है।