प्रश्न 1.
'शृंगार – रस – मंडन' का लेखक कौन है?
A) वल्लभाचार्य
B) गोसाईं विट्ठलनाथ
C) हीरा लाल
D) लल्लू लाल
उत्तर:
सही उत्तर: B) गोसाईं विट्ठलनाथ
UP Board Class 10th Board Paper 2026 801(FA)
कक्षा 10वीं · हिंदी · 2026 · बोर्ड परीक्षा
'शृंगार – रस – मंडन' का लेखक कौन है?
A) वल्लभाचार्य
B) गोसाईं विट्ठलनाथ
C) हीरा लाल
D) लल्लू लाल
उत्तर:
सही उत्तर: B) गोसाईं विट्ठलनाथ
सदल मिश्र की रचना है :
A) नासिकेतोपाख्यान
B) राजनीति
C) भाषा योग वाशिष्ठ
D) सुखसागर
उत्तर:
सही उत्तर: A) नासिकेतोपाख्यान
'शुक्ल-युग' की समय-सीमा है :
A) सन् 1900 से 1920
B) सन् 1850 से 1900
C) सन् 1918 से 1938
D) सन् 1938 से 1950
उत्तर:
सही उत्तर: C) सन् 1918 से 1938
कहानी की दृष्टि से छायावाद युग को कहा जाता है :
A) प्रसाद युग
B) शुक्ल युग
C) द्विवेदी युग
D) प्रेमचंद युग
उत्तर:
सही उत्तर: D) प्रेमचंद युग
गद्य की विधा नहीं है :
A) आलोचना
B) खण्ड काव्य
C) नाटक
D) कहानी
उत्तर:
सही उत्तर: B) खण्ड काव्य
'रीति काल' की काव्य धारा नहीं है :
A) रीति बद्ध काव्य धारा
B) रीति मुक्त काव्य धारा
C) रीति सिद्ध काव्य धारा
D) रीति रिवाज काव्य धारा
उत्तर:
सही उत्तर: D) रीति रिवाज काव्य धारा
भूषण की रचना है :
A) शिवा बावनी
B) कवि प्रिया
C) गंगा लहरी
D) रस राज
उत्तर:
सही उत्तर: A) शिवा बावनी
'द्विवेदी युग' का नाम किस साहित्यकार के नाम पर पड़ा?
A) सोहन लाल द्विवेदी
B) आ. महावीर प्रसाद द्विवेदी
C) हजारी प्रसाद द्विवेदी
D) राधा कृष्ण दास
उत्तर:
सही उत्तर: B) आ. महावीर प्रसाद द्विवेदी
'तार सप्तक' का प्रकाशन कब हुआ?
A) सन् 1936 में
B) सन् 1951 में
C) सन् 1943 में
D) सन् 1947 में
उत्तर:
सही उत्तर: C) सन् 1943 में
'ठंडा लोहा' के रचनाकार है :
A) अज्ञेय
B) गिरजा कुमार माथुर
C) शमशेर बहादुर
D) धर्मवीर भारती
उत्तर:
सही उत्तर: D) धर्मवीर भारती
'हास्य' रस का स्थायी भाव है :
A) रति
B) हास
C) क्रोध
D) शोक
उत्तर:
सही उत्तर: B) हास
मात्रा तथा वर्ण के आधार पर छंद के भेद है :
A) दो
B) पाँच
C) तीन
D) चार
उत्तर:
सही उत्तर: A) दो
“चरण-कमल बंदौ हरि राई”
उपर्युक्त पंक्ति में कौनसा अलंकार है?
A) उपमा
B) उत्प्रेक्षा
C) अनुप्रास
D) रूपक
उत्तर:
सही उत्तर: D) रूपक
'परिचय' शब्द में उपसर्ग है :
A) प
B) पर
C) परि
D) परिच
उत्तर:
सही उत्तर: C) परि
'चौराहा' शब्द में समास है :
A) द्विगु
B) बहुव्रीहि
C) कर्मधारय
D) द्वन्द्व
उत्तर:
सही उत्तर: A) द्विगु
'आँसू' का तत्सम-रूप है :
A) अश्रु
B) अक्षि
C) आँख
D) आखर
उत्तर:
सही उत्तर: A) अश्रु
इनमें से कौनसा शब्द सर्वनाम है?
A) रमेश
B) मैं
C) लखनऊ
D) पुस्तक
उत्तर:
सही उत्तर: B) मैं
'चंद्रमा' का पर्यायवाची नहीं है :
A) शशि
B) राकेश
C) देव
D) निशाकर
उत्तर:
सही उत्तर: C) देव
वाच्य के कितने भेद होते हैं?
A) दो
B) चार
C) छह
D) तीन
उत्तर:
सही उत्तर: D) तीन
'तद्' शब्द का चतुर्थी विभक्ति एकवचन रूप है –
A) तस्याम्
B) तस्मै
C) तस्य
D) तानि
उत्तर:
सही उत्तर: B) तस्मै
खण्ड – 'ब' (वर्णनात्मक प्रश्न)
निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
भिन्न-भिन्न धर्मों के माननेवाले भी, जो सारी दुनिया के सभी देशों में बसे हुए हैं, यहाँ भी थोड़ी बहुत संख्या में पाये जाते हैं और जिस तरह यहाँ की बोलियों की गिनती आसान नहीं, उसी तरह यहाँ भिन्न-भिन्न धर्मों के संप्रदायों की भी गिनती आसान नहीं। इन विभिन्नताओं को देखकर अगर अपरिचित आदमी घबराकर कह उठे कि यह एक देश नहीं, अनेक देशों का एक समूह है, यह एक जाति नहीं, अनेक जातियों का समूह है तो इसमें आश्चर्य की बात नहीं। क्योंकि ऊपर से देखने वाले को, जो गहराई में नहीं जाता, विभिन्नता ही देखने में आयेगी।
i) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
ii) लेखक ने भारतीय संस्कृति को अनेक देशों का समूह क्यों कहा है?
iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
अथवा
विश्वासपात्र मित्र से बड़ी भारी रक्षा रहती है। जिसे ऐसा मित्र मिल जाये, उसे समझना चाहिए कि खजाना मिल गया। विश्वासपात्र मित्र जीवन की एक औषधि है। हमें अपने मित्रों से यह आशा रखनी चाहिए कि वे उत्तम संकल्पों में हमें दृढ़ करेंगे, दोषों और त्रुटियों से हमे बचायेंगे। हमारे सत्य, पवित्रता और मर्यादा के प्रेम को पुष्ट करेंगे, जब हम कुमार्ग पर पैर रखेंगे, तब वे हमें सचेत करेंगे, जब हम हतोत्साहित होंगे, तब वे हमें उत्साहित करेंगे।
i) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
ii) विश्वास पात्र को जीवन की औषधि क्यों कहा जाता है?
iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
(प्रथम गद्यांश के उत्तर):
i) संदर्भ:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिन्दी' के गद्य-खण्ड में संकलित 'भारतीय संस्कृति' नामक निबंध से उद्धृत है। इसके लेखक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद हैं।
ii) उत्तर:
भारत में विभिन्न धर्मों, संप्रदायों, भाषाओं और जातियों की अत्यधिक विविधता पाई जाती है। इसी बाहरी विविधता को देखकर, गहराई से न समझने वाला कोई बाहरी व्यक्ति भ्रमवश भारत को एक देश न मानकर अनेक देशों का समूह कह देता है।
iii) रेखांकित अंश की व्याख्या:
लेखक का कथन है कि भारत में विविधताओं का विस्तार इतना अधिक है कि यदि कोई बाहरी या अपरिचित व्यक्ति इसे सतही तौर पर देखता है, तो वह भ्रमित हो सकता है। उसे लगेगा कि यह एक अखंड देश न होकर अलग-अलग देशों और जातियों का समूह है। ऐसा सोचना स्वाभाविक है, क्योंकि जो व्यक्ति भारत की आंतरिक एकता और सांस्कृतिक गहराई को नहीं समझता, उसे केवल ऊपर से दिखाई देने वाली विविधताएँ ही दृष्टिगोचर होती हैं।
(अथवा वाले गद्यांश के उत्तर):
i) संदर्भ:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिन्दी' के गद्य-खण्ड में संकलित 'मित्रता' नामक निबंध से लिया गया है। इसके लेखक आचार्य रामचंद्र शुक्ल हैं।
ii) उत्तर:
विश्वासपात्र मित्र को जीवन की औषधि इसलिए कहा गया है क्योंकि जिस प्रकार अच्छी औषधि व्यक्ति के शारीरिक रोगों को दूर करके उसे स्वस्थ बनाती है, उसी प्रकार एक सच्चा मित्र मनुष्य की मानसिक बुराइयों, दोषों और कुमार्गी प्रवृत्तियों को दूर करके उसके जीवन को सन्मार्ग पर लाता है।
iii) रेखांकित अंश की व्याख्या:
लेखक कहते हैं कि सच्चा और विश्वासपात्र मित्र जीवन में दवा के समान गुणकारी होता है। एक अच्छे मित्र का यह कर्तव्य है कि वह हमें श्रेष्ठ एवं सन्कार्यों को करने के लिए प्रेरित करे, हमारी गलतियों और दोषों से बचाए तथा हमारे चरित्र को सत्य, पवित्रता और मर्यादा से परिपूर्ण बनाए। जब भी हम किसी गलत रास्ते पर कदम बढ़ाएँ तो वह हमें सावधान करे और निराशा के क्षणों में हमारे भीतर नए उत्साह का संचार करे।
दिए गए पद्यांश पर आधारित तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
चरण-कमल बंदौ हरि राई।
जाकी कृपा पंगु गिरिं लंघै, अंधे को सब कछु दरसाइ।
बहिरौ सुनै, गूँग पुनि बोलै, रंक चलै सिर छत्र धरइ।
सूरदास स्वामी करुनामय, बार-बार बंदौ तिहि पाइ॥
i) उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
ii) 'चरण-कमल बंदौ हरि राई।' पंक्ति में कौनसा अलंकार है?
iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (पंक्ति: चरण-कमल बंदौ हरि राई। जाकी कृपा पंगु गिरिं लंघै, अंधे को सब कछु दरसाइ।)
अथवा
बढ़ जाता है मान वीर का,
रण में बलि होने से।
मूल्यवती होती सोने की,
भस्म यथा सोने से॥
रानी से भी अधिक हमें अब,
यह समाधि है प्यारी।
यहाँ निहित है स्वतंत्रता की,
आशा की चिंगारी॥
i) उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
iii) 'स्वतंत्रता' और 'आशा' शब्द का विलोम लिखिए।
उत्तर:
(प्रथम पद्यांश के उत्तर):
i) संदर्भ:
प्रस्तुत पद हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिन्दी' के काव्य-खण्ड में संकलित 'पद' शीर्षक से उद्धृत है। इसके रचयिता महाकवि सूरदास जी हैं।
ii) अलंकार:
'चरण-कमल बंदौ हरि राई' पंक्ति में रूपक अलंकार (और अनुप्रास अलंकार) है।
iii) रेखांकित अंश की व्याख्या:
भक्त कवि सूरदास जी भगवान श्री कृष्ण के कमल रूपी चरणों की वंदना करते हुए कहते हैं कि प्रभु की कृपा अत्यधिक अपरंपार है। यदि उनकी कृपा हो जाए तो लँगड़ा व्यक्ति भी बड़े से बड़े पर्वत को लांघ जाता है और अंधे व्यक्ति को सब कुछ दिखाई देने लगता है।
(अथवा वाले पद्यांश के उत्तर):
i) संदर्भ:
प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिन्दी' के काव्य-खण्ड में संकलित 'झाँसी की रानी की समाधि पर' शीर्षक कविता से उद्धृत है। इसकी रचयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान हैं।
ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:
कवयित्री का कथन है कि युद्धभूमि में अपना बलिदान देने से वीर योद्धा का सम्मान और अधिक बढ़ जाता है। जिस प्रकार सोने से भी अधिक मूल्यवान उसकी भस्म (सोने की भस्म) होती है, उसी प्रकार देश की वेदी पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर का मूल्य तथा सम्मान सामान्य जीवन से कहीं अधिक हो जाता है।
iii) विलोम शब्द:
• स्वतंत्रता का विलोम — परतंत्रता
• आशा का विलोम — निराशा
निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का सन्दर्भसहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
मानव-जीवनस्य संस्करणं संस्कृतिः। अस्माकं पूर्वजाः मानवजीवनं संस्कृतुं महान्तं प्रयत्नं अकुर्वन्। ते अस्माकं जीवनस्य संस्करणाय यान् आचारान् विचारान् च अदर्शयन् तत् सर्वं अस्माकं संस्कृतिः।
अथवा
एकदा बहवः जनाः धूमयानम् (रेल) आरुह्य नगरं प्रति गच्छन्ति स्म। तेषु केचित् ग्रामीणाः केचित् च नागरिकाः आसन्। मौनं स्थितेषु तेषु एकः नागरिकः ग्रामीणान् उपहसन् अकथयत्–”ग्रामीणाः अद्यापि पूर्ववत् अशिक्षिताः अज्ञाश्च सन्ति। न तेषां विकासः अभवत् न भवितुं शक्नोति।”
उत्तर:
(प्रथम गद्यांश का अनुवाद):
संदर्भ:
प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिन्दी' के संस्कृत-खण्ड में संकलित 'भारतीय संस्कृतिः' पाठ से उद्धृत है।
हिन्दी अनुवाद:
मानव जीवन को सँवारना ही संस्कृति है। हमारे पूर्वजों ने मानव जीवन को शुद्ध एवं सुंदर बनाने के लिए महान प्रयत्न किए थे। उन्होंने हमारे जीवन के संस्कार एवं परिष्कार के लिए जिन आचारों और विचारों का प्रदर्शन किया, वह सब हमारी संस्कृति है।
(अथवा वाले गद्यांश का अनुवाद):
संदर्भ:
प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिन्दी' के संस्कृत-खण्ड में संकलित 'प्रबुद्धो ग्रामीणः' पाठ से उद्धृत है।
हिन्दी अनुवाद:
एक बार बहुत से लोग रेलगाड़ी पर सवार होकर नगर की ओर जा रहे थे। उनमें कुछ ग्रामीण और कुछ नगरवासी (शहरी) थे। उनके शांत बैठे होने पर एक नागरिक ने ग्रामीणों का उपहास करते हुए कहा– "ग्रामीण आज भी पहले की भाँति अशिक्षित और अज्ञानी हैं। न तो उनका विकास हुआ है और न ही हो सकता है।"
दिए गए श्लोकों में से किसी एक श्लोक का सन्दर्भसहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
बंधनं मरणं वापि जयो वापि पराजयः।
उभयत्र समो वीरः वीरभावो हि वीरता॥
अथवा
धान्यानामुत्तमं किस्विद्, धनानां स्यात् किमुत्तमम्।
लाभानां किमुत्तमं स्यात्, सुखानां स्यात् किमुत्तमम्॥
उत्तर:
(प्रथम श्लोक का अनुवाद):
संदर्भ:
प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिन्दी' के संस्कृत-खण्ड के 'वीरः वीरेण पूज्यते' पाठ से उद्धृत है।
हिन्दी अनुवाद:
चाहे बंधन हो या मृत्यु हो, चाहे जय हो या पराजय हो; वीर पुरुष दोनों ही स्थितियों में समान रहता है। वीर भावना को ही वीरता कहते हैं।
(अथवा वाले श्लोक का अनुवाद):
संदर्भ:
प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिन्दी' के संस्कृत-खण्ड के 'जीवन-सूत्राणि' पाठ से उद्धृत है।
हिन्दी अनुवाद:
अन्नों (धान्यों) में उत्तम क्या है? धनों में उत्तम धन क्या है? लाभों में श्रेष्ठ लाभ क्या है? और सुखों में सबसे उत्तम सुख क्या है?
अपने पठित खण्ड-काव्य के आधार पर दिए गए प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का उत्तर लिखिए।
(नोट: छात्र अपने जिले के लिए निर्धारित खण्ड-काव्य के अनुसार उत्तर लिखें। उदाहरणार्थ 'मुक्ति दूत' खण्ड काव्य पर आधारित उत्तर यहाँ दिया जा रहा है)
क) i) 'मुक्ति दूत' खण्ड काव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
ii) 'मुक्ति दूत' खण्ड काव्य के आधार पर महात्मा गाँधी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर:
(क) ii) 'मुक्ति दूत' के नायक 'महात्मा गाँधी' का चरित्र-चित्रण:
डॉ. रामकुमार वर्मा द्वारा रचित 'मुक्ति दूत' खण्डकाव्य के नायक राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. सत्य और अहिंसा के पुजारी: गाँधी जी ने सत्य और अहिंसा को अपना अस्त्र बनाया तथा बिना खड्ग और ढाल के देश को स्वतंत्रता दिलाई।
2. हरिजनोद्धारक तथा समाज सुधारक: उन्होंने समाज में व्याप्त छूआछूत, जाति-पाति तथा कुरीतियों का घोर विरोध किया और दलितों को 'हरिजन' नाम देकर सम्मान दिलाया।
3. महान देशभक्त एवं युगपुरुष: गाँधी जी का संपूर्ण जीवन देश सेवा के लिए समर्पित था। वे अंग्रेजों के अत्याचार से भारत माँ को मुक्त कराने हेतु सदैव तत्पर रहे।
4. दृढ़ निश्चयी और निर्भीक: विरोध एवं कारागार की यातनाओं के बावजूद वे अपने लक्ष्य से कभी विचलित नहीं हुए।
(क) निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।
i) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
ii) जयशंकर प्रसाद
iii) डॉ. भगवत शरण उपाध्याय
(ख) निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।
i) तुलसीदास
ii) सुमित्रानंदन पंत
iii) श्याम नारायण पाण्डेय
उत्तर:
(क) i) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
जीवन-परिचय:
हिन्दी साहित्य के मूर्धन्य आलोचक और निबंधकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जन्म सन् 1884 ई. में बस्ती जिले के अगोना नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम चंद्रबली शुक्ल था। इन्होंने मिर्जापुर के मिशन स्कूल से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। कुछ समय तक मिर्जापुर के न्यायालय में नौकरी की, तत्पश्चात् मिर्जापुर के मिशन स्कूल में चित्रकला के अध्यापक हो गए। बाद में ये काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिन्दी विभागाध्यक्ष के पद पर सुशोभित हुए। सन् 1941 ई. में इनका स्वर्गवास हो गया।
प्रमुख रचनाएँ:
• चिंतामणि (निबंध संग्रह)
• हिन्दी साहित्य का इतिहास
(ख) i) गोस्वामी तुलसीदास
जीवन-परिचय:
भक्तिकाल की रामभक्ति शाखा के शिरोमणि कवि गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म सन् 1532 ई. (संवत 1589) में बांदा जिले के राजापुर ग्राम में माना जाता है। इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था। इनका बाल्यकाल कष्टों में बीता। इनके गुरु नरहरिदास थे। इनका विवाह रत्नावली से हुआ था। पत्नी के उपदेश से इनके मन में वैराग्य उत्पन्न हुआ और ये श्री राम के भजन में लीन हो गए। सन् 1623 ई. (संवत 1680) में काशी के असि घाट पर इनका निधन हुआ।
प्रमुख रचनाएँ:
• श्रीरामचरितमानस (प्रबंध काव्य)
• विनयपत्रिका, कवितावली
अपनी पाठ्यपुस्तक में से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए, जो इस प्रश्न पत्र में न आया हो।
उत्तर:
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
अपनी बहन की शादी में आमंत्रित करने हेतु अपने मित्र को पत्र लिखिए।
अथवा
एक दिन का अवकाश लेने हेतु प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र लिखिए।
उत्तर:
(बहन की शादी में आमंत्रण हेतु मित्र को पत्र):
परीक्षा भवन,
दिनांक: 15 मार्च 2026
प्रिय मित्र राहुल,
सप्रेम नमस्ते।
तुम्हें यह बताते हुए अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है कि मेरी पूजनीय बहिन (सोनम) का शुभ विवाह दिनांक 25 मार्च 2026 को निश्चित हुआ है। विवाह समारोह हमारे निवास स्थान से ही संपन्न होगा।
इस शुभ अवसर पर तुम्हारी उपस्थिति मेरे और मेरे परिवार के लिए अत्यंत आवश्यक एवं आनंददायक होगी। तुम विवाह से दो दिन पूर्व ही आ जाना ताकि हम मिलकर व्यवस्थाओं में सहयोग कर सकें और आनंद उठा सकें।
चाचा जी एवं चाची जी को मेरा प्रणाम कहना। तुम्हारे आने की प्रतीक्षा में।
तुम्हारा अभिन्न मित्र,
क. ख. ग.
निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में लिखिए।
i) चन्द्रशेखरः कः आसीत्?
ii) विश्वासः केन वर्धते?
iii) पुरुराजः केन सह युद्धम् अकरोत्?
iv) वाराणसी केषां संगमस्थली अस्ति?
उत्तर:
i) उत्तरम्: चन्द्रशेखरः प्रसिद्धः क्रान्तिकारी देशभक्तश्च आसीत्।
iii) उत्तरम्: पुरुराजः अलक्षेन्द्रेण सह युद्धम् अकरोत्।
iv) उत्तरम्: वाराणसी विविधधर्माणां संगमस्थली अस्ति।
(किन्हीं दो के उत्तर देने हैं, यहाँ परीक्षार्थियों की सुविधा हेतु सटीक उत्तर प्रस्तुत किए गए हैं।)
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए।
i) मोबाइल का दुष्प्रभाव
ii) हिन्दी हमारी शान है
iii) छात्र-जीवन में अनुशासन का महत्व
iv) देश-प्रेम
v) ऑपरेशन सिन्दूर : भारत की शौर्य गाथा
उत्तर:
निबंध: छात्र-जीवन में अनुशासन का महत्व
1. प्रस्तावना:
'अनुशासन' दो शब्दों से मिलकर बना है— 'अनु' और 'शासन', जिसका अर्थ है नियमों का पालन करना या शासन के पीछे चलना। मानव जीवन में अनुशासन का वही स्थान है जो शरीर में रीढ़ की हड्डी का होता है। विशेष रूप से छात्र-जीवन में अनुशासन सफलता की कुंजी है।
2. छात्र-जीवन और अनुशासन:
विद्यार्थी जीवन मानव जीवन की आधारशिला है। इस काल में बच्चा जो संस्कार, आदतें और ज्ञान अर्जित करता है, वही उसके भावी जीवन की दिशा तय करता है। अनुशासित छात्र समय का सही उपयोग करता है, अपने गुरुओं और बड़ों का आदर करता है तथा एकाग्रचित्त होकर विद्या अध्ययन करता है।
3. अनुशासन के लाभ:
• व्यक्तित्व का विकास: अनुशासित छात्र का मानसिक और शारीरिक विकास संतुलित ढंग से होता है।
• लक्ष्य प्राप्ति: समय सारणी का पालन करने से छात्र पढ़ाई और खेलकूद दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं।
• सद्गुणों का विकास: अनुशासन से धैर्य, सहिष्णुता, सत्यता और कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुणों का विकास होता है।
4. अनुशासनहीनता के कारण व दुष्परिणाम:
आजकल कुसंगति, मोबाइल का अनियंत्रित उपयोग और उचित मार्गदर्शन की कमी के कारण छात्रों में अनुशासनहीनता बढ़ रही है। अनुशासनहीन छात्र न केवल अपना भविष्य अंधकारमय कर लेता है, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी बाधा बनता है।
5. उपसंहार:
अनुशासन कोई थोपी हुई वस्तु नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण की प्रक्रिया है। छात्रों को स्वयं अनुशासित रहना सीखना चाहिए। देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि हमारी युवा पीढ़ी अनुशासित, संस्कारवान और समर्पित बने।